काश मेरा नाम मिथ्या न होता ।


भावनओं की सारी नदीयाँ सुख जाती

मेरा भी कोई वजूद होता,

कोई वजह होती।

इस उन्मुक्त गगन में जी भर कुचालें भरता

नभ के उन तारों को छूता,

चन्द्रमा से खेलता।

दूर कहीं क्षितिज में

एक वसुन्धरा होती…….,

इन्सां होते

प्यार होता।

काश अगर मेरा नाम मिथ्या न होता।

 

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Hi guys m Bhav.